मत खोल मेरी माजी की किताबों को,
जो मैं था वह मैं रहा नहीं,
और जो मैं हूं वह किसी को पता नहीं।
• नफरतों के शहर में
चालाकीओ के डेरे हैं।
यहां वह लोग रहते हैं,
जो तेरे मुंह पर तेरे,
और मेरे मुंह पर मेरे हैं।
• जहां सुनने वाले को सब्र आ जाए ना,
वहां बोलने वाले की औकात दो कौड़ी की हो जाती है।
-🖋️ धर्म
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