ये दोस्ती का दिन है तो कुछ बात कहनी थी ।
बचपन के कुछ छूट गए ,
जो जीगरी थे वो भूल गए ।
समझ नहीं आता ये दोस्ती है या दिखावा ,
कभी ढेर सारी बाते तो कभी सन्नाटा ।
शायद सब व्यस्त हो गए ,
या फिर कुछ दूसरे और मिल गए ।
कभी हस्ते हुए मिजाज ,
कभी रूठा हुआ दिमाग ।
कभी सुझाव की बोछार ,
कभी दुश्मनी भरी दीवार ।
समझ नहीं आता ये दोस्ती है या दिखावा ,
कभी ढेर सारी बाते तो कभी सन्नाटा ।
Nice
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ReplyDeleteTHANK YOU
DeleteNice
ReplyDelete👌👌👌
ReplyDeleteTHANK YOU
DeleteDear writer...
ReplyDeleteVery true line 💯 ❣
THANK YOU
DeleteSuper ♡really ❤❤❤❤
ReplyDeleteNice
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